Thursday, 5 November 2015


                              सयुक्त मकान ही बचे है सयुक्त परिवार नहीं 

हम सब सयुक्त परिवार के बच्चे है और जिंदगी के किसी न किसी मोड़ पर हम सब सयुक्त परिवार के हिस्सा है एवम हम सब सयुक्त परिवार के लुफ्तो से भली भाती वाकिफ है पर आज सयुक्त परिवार की तस्वीर बदल चुकी है पहले जो सयुक्त परिवार थे वे कुछ इस तरह थे व्यक्तियों के उस समूह को सयुक्त परिवार के रूप में रखा गया जिसमे दो या दो से अधिक पीढ़ियों के सदस्य एक स्थान पर निवास करते है और वे परस्पर किसी न किसी प्रकार से रक्त सम्बंधित होते है एवंम उत्पादन करने वाले सभी साधनो पर परिवार के सभी सदस्यों का समान अधिकार हो तथा जो भी आय हो परिवार की, उसका उपभोग भी सभी के लिए समान हो पर थ्योरी आज के सयुक्त परिवार पर लागु लागू नहीं होती क्योकि आज सयुक्त पत्थर , बालू ,सीमेंट ,मौरंग के बने घर ही बचे हुए है जिसमे परिवार के सदस्य रहते है और समाज कि नजरो में धूल झोंकते है और समाज को दिखाते है की ये सयुक्त परिवार का आयना है पर जो असल में होता नहीं।.
                                                     सवाल तो ये है कि  सयुक्त परिवार की ये तस्वीर किसने बनाई  इस प्रश्न के उत्तर से रूबरू होने के लिए सयुक्त परिवार  के कार्यशैली पर विचार करने के उपरांत ही जाना जा सकता है कार्यशैली पर विचार करने के उपरांत  यह मालूम होता है कि सयुक्त परिवार की  कुछ मुख्य विशेषता जैसे -मुखिया का शासन ने ही सयुक्त परिवार की तस्वीर बदली, मुखिया ने अपने शासन को सर्वोपरि बनाय रखने  के लिए परिवार में रह रहे अन्य सदस्यों को सम्मान देना नहीं सीखा जिस कारण सयुक्त परिवार की तस्वीर बदल गई 
                             सयुक्त परिवार में पैसे की नहीं सम्मान कि बहुत कमी