विधार्थी के जीवन ने गुरु एक दर्पण की तरह है विधार्थी गुरु के बताय उपदेश को अपने जीवन में ढाल कर अपने जीवन को अच्छा बना सकता जिस प्रकार इंसान अपने शरीर दर्पण में देख कर जो चीज उसे अपने शरीर में सही नहीं दिखती उसे वह ठीक कर लेता है उदाहरण .... बाल कंघी करना , चहरे पर क्रीम लगाना आदि ( जिससे वह अच्छा दिखने लगता है ) जैसे- जैसे इंसान गुरु के बताय उपदेश को अपने जीवन में उतरने लगता है वैसे वैसे वह समाज में अच्छा दिखने लगता है ……

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