सरकार को संविदा पर कार्यकाल सौपना चाहिए
राज्य में कोई नई सरकार बननी होती है तो विभिन्य पोलिटिकल पार्टीया लोककल्याणकारी एजेंडा को जनता से परचित कराते है और इसी तरह अन्य पॉलिटिकल पार्टीया भी अपने अपने एजेंडे को जनता के सामने रखती है जो सभी लोककल्याण राज्य के निर्माण की तरफ जोर देते है और इन्ही एजेंडे को देख कर कोई पॉलिटिकल पार्टी को 5 वर्ष के लिए राज्य की कमान जनता द्वारा दे दी जाती है और राज्य की कमान सम्हाल रही पोलिटिकल पार्टी पर जनता विश्वास लगाय रहती है की जैसा पार्टी ने एजेंडा दिया है उस तरह काम भी करेगी यदि 5 वर्ष बाद वो पोलिटिकल पार्टी यदि सरकार बनने से पहले दिए गए वादा (एजेंडे) को पूरा नहीं करती तो जनता की नजरो में लोककल्याणकारी सरकार की छवि बिगड़ती है
चुनाव के पहले जो आप को कमी राज्य में दिख रही थी वो कमी चुनाव के बाद भी दिखनी चाहिए , सरकार की इन कमियों को सरकार बानाने वाली पोलिटिकल पार्टी को संविदा पर रख कर ही जनता के प्रति बिगड़ी सरकार की छवि को ठीक किया जा सकता है क्योकि अभी तक जनता तुक्का लगा रही है की जो सरकार आ रही है वो विकास करेगी कि नहीं जानता को पता नहीं है
क्योकि सरकार जनता को कोई सेयोरटी नहीं देती है जब सरकार संविदा पर बनाई जाएगी तो उसकी जिम्मे दरी जनता कर प्रति जरूर बन जाएगी क्योंकी सरकार को मालूम होगा की जब वह एजेंडा को पूरा नहीं करेगी तो उसे जनता को कम्पन्सेशन देना होगा जिससे राजनीतिक पार्टी द्वारा दिए गये वादे को पूरा करना आवश्यक हो जायेगा किस्सा तो सुना ही होगा तालिया दोनों हाथो से बजती है बात यह है की जनता सरकार दोनों को एक दूसरे पर विस्वास होना चाहिए
आप ने जिंदगी में ऐसा बहुत बार देखा एवं सूना होगा की जो वादे सरकार करती है उसे पूरा करने के लिए लोग भगवान से प्रथना करते है बल्कि वादो को पूरा करने का काम उसी का होता है जो उसे देता है यानि जब हम सरकार को कॉन्ट्रैक्ट पर लायेगे तो ही सरकार जनता को दिए वादो को पुरा करेगी जिससे सरकार और जनता का एक दूसरे पर विस्वास बना रहेगा
बात सिर्फ इतने है की जब सरकार जनता का विश्वास नहीं करती को जनता सरकार का विश्वास किस आधार पर कर ले उदहारण - जब आप बैंक से लोन लेने जाते है तो लोन देने से पहले वोह सेयोरटी किसी न किसी रूप में आप से मागता है उसके बाद ही लोन देता है ताकि यदि आप बैंक लोन नहीं दे पाय तो वो आप की सेयोरटी जब्त कर लेता है जाहे गीतने भी वादे करे लोन को चुकाने की बिना सेयोरटी नहीं देगा बैंक यांनी बैंक को जनता के वादो की कथनी पर विस्वास नहीं है फर्क केवल इतना ही होगा पॉलिटिकल पार्टी अपने एजेंनडे की लिस्ट मे पहले 25 से 50 एजेंनडा बताती थी जब सरकार संविदा पर बनाई जाए गई तो एजेंनडा 10 से 15 हो जाये सरकार द्वारा जानता को दिया वाला वादे की लिस्ट में कामी आजाएगी लेकिन खुशी की यह बात होगी की जो सरकार वादे करेगी उनेह वो 5 वर्ष में पूरा करेगी
सरकार संविदा करने के लिए सच्छम है यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद-299 सत प्रतिशत सही है सोचकर देखिये देश और जनविस्वाश में बदलाओ को और अभी जल्द दिल्ली में हुए मुख्यमंत्री चुनाव में 100 % वोटर्स वोट देने नहीं आये केवल लगभग 63 % ही वोटर्स वोट देने आये इस तरह हो रही वोटर्स की संख्या में गिरावट को केवल सरकार को संविदा पर लाकर दूर किया जा सकता है और यकीन मानिए सोने की चिड़िया वाला वही सुनहरा हिंदुस्तान एक बार फिर हम सबकी नजरों के सामने होगा
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