निजता के अधिकार का गला घोटना तो पड़ेगा
आज वर्तमान में बहुत से NGO यौन उत्पीड़न अपराध पर रोक लगाने , महिला सशक्ति कारण , महिलाओ की स्थित सुधरने तथा महिलाओ को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने का काम को कर रहे है जो एक अच्छे परिकल्पना को होने को जन्म देता है, यह कहना पड़ रहा है की ऐसे कारिकक्रम तब तक ही अच्छे लगते है जब तक वे किसी स्थान पर चलाए जा रहे हो क्योंकी तब सभी दर्शक कहते है की हम महिलाओ को समाज में सम्मान जनक स्थित में पहुचाएगे और समाज में ऐसा वतावरण का निर्माण करेंगे की जिसमे महिलाओ के जीवन के अनुकूल स्थित हो .
दिक्कत तो वर्तमान न्यूज़ , खबर को देखने उपरांत पैदा होती है जो यह है की यौन उत्पीड़न का अपराध का आरोप शिक्षको, और समाज के ऐसे प्रतिष्ठित व्यक्ति पर लगाय जा रहे है जिनसे उम्मीद की जाती है की वे एक लोककल्याण करी समाज का निर्माण करे एक इंशान ही अपराध को करता है तो इस प्रश्न की गैरंटी की वो अपराध को नहीं करेगा देगा .
जरा विचार कीजिए की यदि विद्दालय एवम अन्य उपयुक्त स्थानो में मानव कार्यो में पारदर्शिता को ल दिया जाए तो शिक्षको द्वारा एवम व्यक्ति द्वारा किये जा रहे यौन उत्पीड़न के अपराध को काम करने पर काफी नकेल लगेगी, और जरा एक पीड़िता की नजर से देखे तो बात समझ में आ रही होगी।
अनुभव तो कहता है - आदमी ही आदमी का सर फोड़ता है ।
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