Sunday, 19 April 2015



                               
         विशेष अवसर पर ही जहम में आती है जनता  एवं उनके दुःख 

 आज भी हम सब को याद होगा वो चुनाव का महीना जब हम सब चुनावी बयार में शामिल हुए और  फिर से जनता के विकास का एजेंडा, एवं पूर्व सरकारी कार्यकाल में हुए जानता के दुःख को जनता के सामने रख कर सत्ता की बाग़ डोर को समाहला और जैसे जैसे चुनाव की बयार ख़त्म होती है वैसे वैसे जनता एवम उनके दुःख भी धुधील होने लगते है और यह लगता है की फिर आने वाली  चुनावी बयार में फिर जनता नजर आएगी और वर्तमान में किसान प्राकर्तिक आपदा का कहर के जख्म का दर्द को सहने की कोशिस कर रहे है और 19/4/2015 के अमर उजाला न्यूज़ पेपर की खबर 2136 करोड़ का बीमा,141 करोड़ प्रीमियम पर किसानो को मिले सिर्फ 1.65 करोड़ ,यह यकीन दिलाती है की आने वाले चुनाव में राजनितिक पार्टीया ये सवाल जनता के सामने  रखेगी और राज्य की सत्ता को हासिल करने का प्रयास करेगी    
                                                        बात समझ में नहीं आती की जब हम सभी को यह पढ़ाया एवं बताया जाता है की भारत एक कृषि प्रधान देश है यानि देश कि कुल सकल आय में कृषि क्षेत्र  से प्राप्त होने वाली आय  का देश कि कुल सकल आय में अंन्य आय के क्षेत्र से अधिक आय की प्राप्ति कृषि क्षेत्र से होती है और दर्शय तो यह भी साहमने अ रहा है की धीरे धीरे ग्रामीण लोगो जो कृषि कार्य करते है वे भी शहर में रहना और काम करने की रूचि लेने लगे है यह एक कृषि प्रधान देश के नजरिये से सही घट नहीं  रहा इसकी जिम्मेदार सरकार की  ही तो  है क्योंकी आप ने कृषि प्रधान  क्षेत्र में  क्या ऐसा काम किया जो कृषि कार्य को बढ़ावा दे आज भी बहुत से किसान सही समय पर सिचाई एवं जोताई की समस्या के जरूर जूझ रहा है और जब कृषक विभिन्न समस्या का सामना करके जब फसल को तैयार करता है तो बहुत बार फसलो को प्राकर्तिक आपदा का सामना करना पड़ता है ऐसी स्थित में सरकार को उनको  समाहलना होता है की  उनका मनोबल न टूट सके उसके लिए आकस्मिक निधि से उनकी मदत करने के लिए तुरंत आगे आना चाहिए न कि अन्नय देश की खुशहाल वादियों का लुफ्त ले मै  ये नहीं कहता की आप अन्नय देश की खुशहाल वादियों का लुफ्त न ले लेकिन इतना तो अंदाजा होता ही है की कब ख़ुशी में शामिल होना है और कब  दुःख में हाल ही में    उत्तर प्रदेश में प्राकर्तिक आपदा के कारण हुई कृषि क्षेत्र में हुई हानि की वजह से कई किसानो ने आत्महत्या कर ली  और ये समस्या थम जाएगी यकीन से नहीं कह सकते ऐसे में सरकार उनको आर्थिक सहायता दे और किसानो के प्रति सहायक की छवि  बनाए
                                                                 प्रश्न यह भी है कि किसानो ने आत्महत्या का हि रास्ता क्यों चुना क्या उनको लगता था की सरकार मदत नहीं करेगी उससे बड़ा प्रश्न यह भी उठता है की उनके मन में सरकार की इतने गन्दी इमेज कैसे आई सरकार के किस काम ने उनके मन में सरकार को सहयोगी न समझ कर दुश्मन की इमेज  बनादी जिसके चलते उन्नोहने सरकार को अपनी परेसानी को बताना सही नहीं समझा और आत्महत्या का रास्ता चुनना सही समझा यह  लोककल्याणकरी राज्य के लिए अच्छे संदेश नहीं है रुकिए ये भी तो जानिए कि  ऐसा मेरे मन में इसलिए  क्योंकि मै भी जनता का एक व्यक्ति हु और  मुझे भी पढ़ाया गया है की भारत एक कृषि प्रधान देश है

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