अब तो झाडू भी बोलने लगी
झाड़ू भी मानव समाज में बोलती है पर इसकी बोली को मानव अपने कानो से डायरेक्ट नहीं सुन सकता है तथा झाड़ू मानव को मानवता का पाठ पढाती है अब आप के मन में बहुत से सवाल उत्पन होने लगे होगे की झाड़ू कहा बोलती है और मानवता का पाठ कैसे बता सकती है मानवता का पाठ तो आम तौर पर एक सामाजिक कार्यकरता या एक इंसान बताता है तो यह आपका भ्रम है अब ये जानते है की कैसे झाड़ू बोलने का काम करती है और कैसे मानवता का पाठ उच्चारित करती है झाड़ू की बोली को सुनने के लिए आप को झाड़ू के काम को समझना होगा आम तैर से झाड़ू समाज में , घर में गंदगी को साफ करने के काम में लाई जाती है मोटा-मोटा झाड़ू का काम गंदगी को दूर कर स्थान को सुन्दर बनाना है तथा झाड़ू लगने के बाद आपको झाड़ू लगा स्थान अच्छा (मनभावक) लगने लगता है और आप उस झाड़ू लगे स्थान पर जाना , रहना , समय बिताना पसंद करते है
हम भारत के ऐसे समाज में रहते है जहा बहुत सी सामाजिक गंदगी दिखती है उन गंदगी को हम कुछ इस प्रकार से जानते है जातिवाद , छुवाछुत , ऊच- नीच , समानता असमानता,मै की भावना आदि और इन सामाजिक गंदगी पर झाड़ू लगन बहुत जरूरी है अभी तक इस सामाजिक व्याप्त गंदगी पर सरकार ने कानून बनाकर इस सामाजिक गंदगी को साफ़ करने की कोशिश की लेकिन अभी तक पूर्ण रूप से साफ़ करने में सफल नहीं हो पाई है क्योकि आप सब का पूरी तरह सहयोग नहीं मिल सका अब आप सोचे की जब स्थानो , घरो में झाड़ू नहीं लगती तो हम वह आना-जाना , उठना - बैठना नहीं पसंद करते है तो इन सब सामाजिक भुरइयो के होते हुए आप कैसे समाज में रह पा रहे है और दूसरे समाज के लोग आप के समाज को क्यों पसंद करे और क्यों आपके समाज में आये
बात सिर्फ इतनी है की जब हम गंदगी को पसंद नहीं करते है तथा गंदगी को झाड़ू लगा कर दूर करते है और स्थान को सुन्दर बना लेते है तो हम सामाजिक गंदगी को भी दूर करके अपने समाज को अच्छा बना सकते है केवल उसके लिए हमें इस विचारधारा में झाड़ू की कही बात को अपनाकर कर सकते है इस बात का प्रूफ कि हमारे समाज में अनेक सामाजिक गंदगी है उसके परपेच्छ में ये व्याक्या तो याद ही होगा की जब अमेरिका के राष्ट्रपती हमारे समाज में आये थे तो वे जब अपने देश गई तो वहा जब हमारे समाज के बारे में पूछा गया तो उनोहने कहा था कुछ इस प्रकार की यदि गांघी जी आज जिन्दा होते तो वो अपने समाज की ये हालत देख कर मर जाते यह व्याक्या अमेरिका के राष्ट्रपती उनोहने हमारे समाज में मौजूदा सामाजिक गंदगी को देख कर ही कहा था जिसके जिम्मेदर केवल हम सब है अब इस सामाजिक गंदगी को दूर करने का काम भी हमारा है दूसरे का नहीं
झाड़ू अपने काम एवं उसके उपयोग उपरांत निकलने वाले परिणाम से समाज में बोलती रहती है पर इंसान है की उसकी आवाज को अनसुना करता रहता है अभी भी समय बाकि की हम झाड़ू की आवाज को सुने और अपने समाज में व्याप्त सामाजिक गंदगी को दूर करे ताकि एक ऐसे समाज का निर्माण हो जिसमे सामाजिक गंदगी नाहो और सभी अन्य समाज हमारे समाज में आने के लिए ललित हो और समाज के व्यक्तियो में मन से आपस में भाई चारा हो बस हमें झाड़ू ने क्या बोला उसके अनुसार कार्य करना है और यकीन मानिये यदि हम झाड़ू की कही बात को अपनाते है तो हमारे समाज से सुन्दर , खुशाल समाज और कही नहीं होगा और हा रुकिए आज भी झाड़ू अपनी आवाज को समाज में प्रसारित कर रही है ……
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