अरे हमारा शिक्षा का पाठ्क्रम भी तो हमें कमजोर बनाने में है 55% जिम्मेदार
अधिकांश गोवेर्मेंट एग्जामिनेशन में जब विधार्थी बैठता है तो यह अनुभव करता है की उसमे अधिकांश ऐसे प्रश्न भी आते है जिनके पढ़ने की प्रैक्टिस उसने बहुत सालो पहले उसके शिक्षा पाठ्क्रम ने छुड़वा दी है अभी बात सही से समझ में नहीं आ रही होगी अब आप जरा सोचिये एक बच्चे के जीवन के शिक्षा पाठ्क्रम के बारे में क्लास 9th तक विद्धार्थी को सभी शिक्षा के क्षेत्र में पढ़ने की आदत डलवाई जाती है और वह पढ़ाई करता है और पेपर देकर पास होकर आगे अगली क्लास में जाता है यानि 10th क्लास में जहा वो अपने पसंद के पढ़ाई वाले क्षेत्र में पढ़ाई करता है और पास हो कर 11th में जाता है जहा उसे निम्न शिक्षा के क्षेत्र में से एक क्षेत्र चुनने को दिया जाता है यानी (आर्ट , मैथ , कोम्मेर्स) में से एक को चुन कर वह पढ़ाई करता है और पास होकर ग्रेजवशन के लिए पहुचता है और फिर से वो मन पसंद पाठ्क्रम में एडमिशन लेता है पढ़ाई करता है और पास होता है और उसके बाद वो गवर्मेंट के एग्जाम पेपर को देता है जहा उसे पता चलता है की ऐसे भी प्रश्न पेपर में आते है जिनको उसने 9th क्लास के बाद उसको शिक्षा पाठ्क्रम ने छुड़वा दिया है जवाब बिलकुल स्पष्ट है जब एक बार शिक्षा पाठ्क्रम विद्धार्थी को मौका देता है की वो अपने पसंद का पाठ्क्रम चुने और पढ़ाई करे
ऐसे में सवाल ये उठता है की शिक्षा पाठ्क्रम चयनित करने वालो को जब मालूम होता है की जब विद्धार्थी को पाठ्क्रम चुनने को दिया जाता है तो जब वे अधिकांश गोवेर्मेंट एग्जाम को देगा तो उस समय कंडिडेट को सब आना चाहिए हर शिक्षा पाठ्क्रम क्षेत्र में तभी वो गोवेर्मेंट एग्जाम पास कर पायेगा तो ऐसे में शिक्षा पाठ्क्रम चयनित बोर्ड क्यों विद्धार्थी को शिक्षा पाठ्क्रम चुनने का मौका क्यों देता है आज भी विद्धार्थी को पाठ्क्रम चुनने का मौका दिया जाता है
अब प्रश्न ये है की या तो सभी गोवेर्मेंट एग्जामिनेशन में भी सब्जेक्ट चोइस के अनुसार पेपर का तरीका लाया जाय और अन्य शिक्षा पाठ्क्रम से प्रश्न ना दिए जाय और उसी एक शिक्षा पाठ्क्रम के आधार पर नियुक्ति करे या फिर विद्धार्थी को कोई शिक्षा पाठ्क्रम को चुनने का कोई मौका 12th क्लास तक न दिया जाये क्योंकी जब वो अधिकांश गोवेर्मेंट एग्जामिनेशन को देगा तो वह उससे सब शिक्षा पाठ्क्रम से प्रश्न पूछे जाएगा जब एक बार किसी सब्जेक्ट की पढ़ने की आदत छूट जाती है तो बच्चा , उसके दवरा छोड़े गए शिक्षा पाठ्क्रम में वह कमजोर महसूस करता है और कोचिंग का सहारा लेने पर मजबूर हो जाता है या रटने की क्रिया का प्रयोग करता है क्यों की उसने शिक्षा पाठ्क्रम को चुना और पढ़ाई की। ....
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